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PMCH के पूर्व प्राचार्य डॉ एनपी सिंह पर कार्रवाई मामले में स्वास्थ्य विभाग ने रखा पक्ष, अंगरक्षक के बयान का दिया हवाला

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पीएमसीएच के पूर्व प्राचार्य डॉ एनपी सिंह को हटाए जाने के मामले में बिहार स्वास्थ्य विभाग ने दूसरी बार प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष रखा है। विभाग ने सरकारी अंगरक्षक के बयान के आधार पर कार्रवाई को उचित बताया है।

पटना/आलम की खबर:पीएमसीएच के पूर्व प्राचार्य डॉ एनपी सिंह को पद से हटाए जाने के मामले में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच बिहार स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए दूसरी बार आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। विभाग ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और सरकारी अंगरक्षक के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि शुरुआती जांच में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मामले की जांच के दौरान डॉ एनपी सिंह के सरकारी अंगरक्षक संजीत कुमार का बयान दर्ज किया गया था। विभाग के अनुसार, अंगरक्षक ने 23 जून की घटनाओं और गतिविधियों के संबंध में जानकारी दी है। इसी बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर विभाग ने कहा है कि पूर्व प्राचार्य के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई उचित प्रक्रिया के तहत की गई है।

हालांकि विभाग ने यह भी साफ किया है कि मामला अभी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा है। पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच जारी है और जांच के दौरान डॉ एनपी सिंह को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। अंतिम फैसला जांच समिति की रिपोर्ट और सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।

सरकारी अंगरक्षक के बयान का दिया हवाला

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जांच के दौरान सरकारी अंगरक्षक संजीत कुमार का बयान महत्वपूर्ण रहा। विभाग के अनुसार, अंगरक्षक ने बताया कि 23 जून को सुबह करीब 9:30 बजे वह डॉ एनपी सिंह के निजी क्लिनिक पहुंचे थे।

बयान के मुताबिक, सुबह करीब 11 बजे डॉ एनपी सिंह अपने आवास के ऊपरी हिस्से से नीचे स्थित निजी क्लिनिक में आए और मरीजों को देखना शुरू किया। अंगरक्षक ने बताया कि शाम करीब 6 बजे तक डॉक्टर ने मरीजों को देखा।

विभाग के अनुसार, उस दिन निजी क्लिनिक में लगभग 15 से 20 मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। अंगरक्षक ने यह भी कहा कि सुबह से शाम तक वह डॉ एनपी सिंह के साथ मौजूद रहे और इस दौरान वह कहीं बाहर नहीं गए।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उपलब्ध जानकारी और जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला सही पाया गया। इसी आधार पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई।

मंत्री निशांत कुमार ने भी रखा अपना पक्ष

इस मामले में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है। मंत्री ने कहा कि पीएमसीएच निरीक्षण के दौरान पूर्व प्राचार्य अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि निरीक्षण की जानकारी पहले ही संबंधित अधिकारियों को दी गई थी।

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, उन्होंने 22 जून को ही पीएमसीएच अधीक्षक को अपने निरीक्षण कार्यक्रम की जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद निरीक्षण के समय प्राचार्य की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया।

मंत्री ने कहा कि डॉ एनपी सिंह अवकाश पर थे, लेकिन इसकी जानकारी विभागीय स्तर पर स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं थी। इसी वजह से पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया गया।

उच्च स्तरीय जांच समिति करेगी पूरे मामले की समीक्षा

स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति सभी पहलुओं की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

जांच समिति यह भी देखेगी कि निरीक्षण के दौरान क्या परिस्थितियां थीं, प्राचार्य की अनुपस्थिति के कारण क्या थे और विभागीय नियमों का पालन हुआ या नहीं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा। जांच प्रक्रिया में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

कार्रवाई को लेकर जारी है विवाद

पीएमसीएच जैसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान के प्राचार्य पद से हटाए जाने के बाद यह मामला चर्चा में है। पूर्व प्राचार्य डॉ एनपी सिंह की ओर से भी इस कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रखा गया है।

वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कार्रवाई किसी व्यक्तिगत आधार पर नहीं बल्कि उपलब्ध तथ्यों और जांच प्रक्रिया के आधार पर की गई है।

विभाग ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर प्रशासन और अनुशासन बनाए रखना है। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर

फिलहाल पीएमसीएच प्रकरण में आगे की दिशा उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट से तय होगी। समिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे मामले में अंतिम जिम्मेदारी किसकी बनती है।

स्वास्थ्य विभाग ने दोहराया है कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ होगी और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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पीएमसीएच में प्रशासनिक बदलाव को लेकर बड़ी खबर

पीएमसीएच जैसे राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में प्रशासनिक अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण होता है। किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी केवल पद संभालना नहीं बल्कि संस्थान की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना भी होती है।

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आधार पर कार्रवाई की बात कही है, जबकि पूर्व प्राचार्य का पक्ष भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। निष्पक्ष जांच ही पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है।

सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना जरूरी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले पर अंतिम तस्वीर साफ होगी।

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